"12 बजे वाला बयान” पर अखिलेश का पलटवार, सीएम योगी पर तीखा सियासी हमला
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Akhilesh Yadav Statement
सीएम योगी के बयान पर अखिलेश यादव का करारा जवाब.
माघ मेले और शंकराचार्य विवाद को लेकर सरकार पर हमला.
संविधान, शिक्षा और भाजपा की राजनीति पर गंभीर आरोप.
Lucknow / उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सीएम योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सीएम योगी के “12 बजे सोकर उठने वाले बबुआ” वाले बयान पर अखिलेश यादव ने सोमवार को तीखा पलटवार किया। गणतंत्र दिवस के मौके पर सपा अध्यक्ष ने कहा कि “कुछ लोग नींद से तो उठ जाते हैं, लेकिन होश में नहीं आते। उनकी आंखें दिन भर बंद रहती हैं। ऐसे लोग जाग कर भी मदहोश रहते हैं।”
दरअसल, रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि “12 बजे सोकर उठने वाले बबुआ को कहां फुर्सत थी कि गरीबों के बारे में सोच सकें। जिस प्रदेश का मुखिया 12 बजे सोकर उठता होगा, उसके लिए सूर्योदय भी सपना ही होगा।” सीएम योगी ने आगे कहा था कि अखिलेश के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी—बेसिक शिक्षा बंजर हो चुकी थी और माध्यमिक शिक्षा नकल का अड्डा बन गई थी।
इस बयान के जवाब में अखिलेश यादव ने न सिर्फ सीएम योगी पर तंज कसा, बल्कि सरकार की नीतियों और रवैये पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मंचों से झूठ फैलाते हैं और विज्ञापनों के जरिए जनता को धोखा देते हैं। अखिलेश ने सवाल उठाया कि “देश कहां पहुंच गया है और हमें कहां होना चाहिए था?” उन्होंने जोर दिया कि देश को संविधान के तहत ही चलना चाहिए और फैसले भी संविधान के दायरे में ही होने चाहिए।
अखिलेश यादव ने माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “सुना है कोई सतुआ बाबा और बथुआ बाबा भी हैं, वैसे ये सीजन तो बथुआ का है।” साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने शंकराचार्य के सामने भी संकट पैदा कर दिया है।
सपा अध्यक्ष ने अपने कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि जो लोग झूठे विज्ञापनों के जरिए जनता को भ्रमित कर रहे हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा का रवैया लगातार संविधान विरोधी होता जा रहा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सीएम योगी और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री मंचों से झूठ का प्रपंच न फैलाएं और शिक्षा सुधार का असत्य राग न अलापें। उन्होंने सवाल किया कि “जब भाजपा नेताओं ने अपने ऊपर लगे मुकदमे हटवाए थे, तब संविधान के किस अनुच्छेद के तहत यह किया गया?”
अपनी पोस्ट में अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग लगातार सनातनी संतों का तिरस्कार कर रहे हैं, अपमानजनक उपमाएं दे रहे हैं और माघ मेले के धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ रहे हैं, उन्हें मौन रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का “धर्म विरोधी चेहरा” अब बेनकाब हो चुका है और सत्ता के अहंकार में डूबी यह राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलने वाली।
कुल मिलाकर, सीएम योगी के बयान के बाद अखिलेश यादव का यह पलटवार साफ दिखाता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में सियासी तकरार और तीखी होने वाली है, जहां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी रहेगा।